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Thursday, 29 March 2018

डेटा बचे ताकि लोकतंत्र बचे


कैंब्रिज एनालिटिका का विवाद उठा तो एक एक कर ऐसे रहस्योद्घाटन हो रहे हैं, जिनके बारे में हमने कभी सोचा तक नहीं था। ये रहस्योद्घाटन अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव में सोशल मीडिया यूजर्स के डेटा के अनधिकृत इस्तेमाल तक सीमित नहीं हैं। खुद भारत में भी भाजपा और कांग्रेस, दोनों से जुड़ी बहुत-सी असुविधाजनक सूचनाएं सामने आई हैं, जिनका मर्म यह है कि हमारे राजनैतिक दल भी अपने राजनैतिक हितों के लिए ऐसी संस्थाओं की मदद लेते रहे हैं, जिनका रिकॉर्ड संदिग्ध है। कैंब्रिज एनालिटिला के जिस पूर्व कर्मचारी क्रिस्टोफर विली ने सारे मामले का रहस्योद्घाटन किया था, उसने अब कहा है कि इस कंपनी ने कांग्रेस के साथ भी काम किया था। उधर, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नमो ऐप्प पर आरोप लगाया है कि वह भी लोगों का अनधिकृत डेटा इकट्ठा करने में जुटा है। बेहतर हो कि सभी संबंधित पक्ष समय रहते निजता और लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ की ऐसी प्रक्रियाओं पर अंकुश की कोई सूरत निकालें। कैंब्रिज एनालिटिका पर आरोप है कि उसने कैंब्रिज विविद्यालय के एक प्रोफेसर द्वारा बनाए गए एप का इस्तेमाल फेसबुक यूजर्स के डेटा का अनधिकृत राजनैतिक इस्तेमाल करने के लिए किया। हालांकि इस ऐप्प के सिर्फ 25 लाख यूजर थे, लेकिन इसकी मदद से कैंब्रिज एनालिटिका ने इन यूजर्स के मित्रों के डेटा भी इकट्ठे कर लिए और इस तरह उसकी पहुंच पांच करोड़ यूजर्स तक जा पहुंची। अगर कोई इतनी बड़ी संख्या में यूजर्स तक पहुंचने और सोशल मीडिया मैसेजिंग के जरिए उनका राजनैतिक मानस बदलने में सक्षम हो जाए तो चुनाव परिणाम बदल सकते हैं। अमेरिका में सभवत: यही हुआ जब अमेरिका के पहले ‘‘फेसबुक राष्ट्रपति’ के रूप में डोनाल्ड ट्रंप अनपेक्षित रूप से हिलेरी क्लिंटन को हराकर चुनाव जीत गए जबकि हिलेरी की सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ तथा उनके भारी-भरकम चुनाव फंड को देखते हुए ऐसा बिल्कुल संभव नहीं लगता था। कुछ-कुछ यही काम भारत में भी हुआ जब विभिन्न चुनावों में कांग्रेस, भाजपा और जनता दल (यूनाइटेड) को लाभान्वित करने की बात सामने आई। मतदाता के मानस को प्रभावित करना आज उतना मुश्किल नहीं रह गया है, जितना वह पहले हुआ करता था। पहले राजनैतिक दलों के चुनाव अभियान ज्यादातर चुनाव सभाओं, विज्ञापनों और जन-संपर्क तक सीमित रहते थे। आज जबकि मोबाइल फोन की बदौलत सोशल मीडिया चौबीसों घंटे आपके साथ है, राजनैतिक दलों को पारंपरिक माध्यमों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है, और न ही उतना लंबा-चौड़ा, राष्ट्रव्यापी खर्च करने की। वे केंद्रीय रूप से, सुनियोजित ढंग से सोशल मीडिया अभियान चलाते रह सकते हैं, और सशरीर हर जगह न जाने के बावजूद गांव-गांव, शहर-शहर तक मतदाता के पास पहुंच सकते हैं। कैंब्रिज एनालिटिका जैसी कंपनियां यह करती हैं कि उनके पास यूजर्स का जो डेटा आता है, उसके आधार पर वे पता लगा लेती हैं कि किस यूजर की राजनैतिक विचारधारा या झुकाव किधर है, उसकी उम्र क्या है, लिंग क्या है, आर्थिक स्तर कैसा है, उसके मित्रों में कौन-कौन हैं, वह किस तरह की सामग्री (कंटेंट) पसंद करता है, उसके रिश्ते किस-किससे हैं, वह शाकाहारी है, या मांसाहारी, किस धर्म या जाति में हैं आदि-आदि।इस जानकारी के आधार पर वे हर यूजर को कस्टमाइज्ड सामग्री दिखाते हैं यानी ऐसा विशिष्ट कंटेंट जो उनको ज्यादा अपील करे। जब यह एक सिलसिलेवार अभियान का रूप ले लेता है, तो धीरे-धीरे मतदाता का मानस बदलने लगता है। यह कवायद तब गैर-कानूनी हो जाती है, जब कोई एजेंसी यूजर को जानकारी दिए बिना उसका डेटा एक्सेस कर रही होती है। कैंब्रिज एनालिटिका ने लोगों की निजता के विरु द्ध अपराध तो किया ही, इस प्रक्रिया में फेसबुक को भी इस्तेमाल कर लिया। इस लिहाज से फेसबुक अपराध में सीधे-सीधे सहभागी न होते हुए भी अपनी लापरवाही के कारण विवाद के केंद्र में आ गई। यह मामला महज साइबर अपराध या निजता के हनन की श्रेणी में नहीं रहा बल्कि उससे कहीं आगे जाकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर कुठाराघात की श्रेणी में आ गया है। इसने हम सबकी आंखें खोल कर इस रहस्य का पर्दाफाश किया है कि कोई एजेंसी, राजनैतिक दल और कुछ चतुर डेटा वैज्ञानिक चाहें तो पूरी की पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बेमानी बना सकते हैं। कोई दल ऐसा करने में कामयाब हो जाता है, तो इसे सिर्फ उसका तकनीकी ज्ञान मात्र मानकर प्रशंसा का पात्र नहीं माना जा सकता बल्कि उसे तकनीकी माध्यमों से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के साथ खिलवाड़ करने के अपराध में कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए। जहां तक यूजर का सवाल है, उसमें इतनी जागरूकता तो होनी जरूरी है कि वह तथा उसकी सूचनाएं अनजान व्यक्तियों द्वारा इस्तेमाल न कर ली जाएं। जब भी वह कोई ऐप्प, वेबसाइट या सेवा इस्तेमाल करता है, तब एक अनुबंध-पत्र पर उसकी मंजूरी ली जाती है। ज्यादातर लोग आंख मूंदकर मंजूरी दे देते हैं। इस पर गौर करना जरूरी है। अंधाधुंध उसे सब कुछ एक्सेस करने की अनुमति क्यों दी जाए? अब कैंब्रिज ने जैसा ऐप्प बनाया वह तो आपराधिक कृत्य में संलग्न था, और उसमें अपने डेटा का दुरु पयोग होने से रोकने के लिए शायद यूजर कुछ भी नहीं कर सकते थे क्योंकि उन्हें इस बात का पता ही नहीं था कि किसी मित्र द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला ऐप्प उनके डेटा को भी गुपचुप इकट्ठा कर रहा है। लेकिन अगर आप अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल की सेटिंग्स पर नजर डालेंगे तो पाएंगे कि वहां पर आपको अनधिकृत डेटा एक्सेस से बचाने के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। आप चाहें तो अपनी सामग्री को देखे जाने का अधिकार सिर्फ अपने मित्रों तक सीमित रख सकते हैं। इन सेटिंग्स का उपयोग जरूर करें। हालांकि हमारे देश के साइबर कानून स्पष्ट और कड़े हैं, लेकिन सोशल मीडिया एक नया माध्यम है, और उसमें समय-समय पर ऐसे नये पहलू सामने आते रहेंगे जो कानूनों में संशोधन की जरूरत को रेखांकित करते रहेंगे। सोशल मीडिया को सुरक्षित, निजता को अपरिहार्य तथा लोकतंत्र को बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त बनाए रखना बेहद जरूरी है।

Saturday, 9 December 2017

सरप्राइज गिफ्ट : अवैद्य संबंधों का था शक, तो बीवी की कर दी हत्या






19 जून, 2017 की शाम मनोज बेहद खुश था. लेकिन उस के दोस्त अनुज को उस की यह बेवजह की खुशी समझ में नहीं आ रही थी. जब रहा न गया तो अनुज ने पूछ ही लिया, ‘‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना क्यों हो रहा है, कुछ बताएगा भी या यूं ही बकवास करता रहेगा.’’

‘‘बताऊंगा, पर ऐसे नहीं. पहले मिल कर थोड़ा जश्न मनाते हैं. फिर अपनी खुशी का राज जाहिर करूंगा. ये ले पैसे और औफिसर्स चौइस की बोतल, तले हुए काजू, नमकीन और सिगरेट का पैकेट ले आ. सोच ले, आज मैं तुझे अपनी आजादी की पार्टी दे रहा हूं.’’ कह कर उस ने पर्स से 2 हजार रुपए का नोट निकाल कर अनुज को दे दिया.

अनुज की समझ में तो कुछ नहीं आया, लेकिन उस ने मनोज के हाथों से 2 हजार रुपए का नोट ले कर जेब में रखा और शराब के ठेके की ओर चला गया. कुछ देर बाद वह सारा सामान ले आया तो दोनों कमरे में पीने बैठ गए. मनोज ने 2 पैग बनाए और जाम से जाम टकराने के बाद दोनों शराब पीने लगे. जब मनोज पर नशे का सुरूर चढ़ा तो उस ने कहना शुरू किया, ‘‘अनुज, जानते हो मैं आज इतना खुश क्यों हूं.’’

‘‘जब तक तू बताएगा नहीं, तब तक मैं कैसे जानूंगा कि तेरे मन में किस बात को ले कर लड्डू फूट रहे हैं.’’ नशे की झोंक में अनुज उस की ओर देख कर बोला.

‘‘बेटे, आज मैं आजाद हो गया हूं.’’

‘‘पहेलियां न बुझा कर सीधी तरह बता, तेरी इस खुशी का राज क्या है?’’ अनुज ने चौथा पैग पीते हुए उत्सुकता से पूछा.

‘‘मैं ने तेरी भाभी को खुदागंज रवाना कर दिया है. मुझे उस से हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया है.’’

मनोज की बात सुन कर अनुज को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब उस ने पूरी बात बताई तो उसे लगा कि हो न हो मनोज ने कोमल की हत्या कर दी है. अनुज का सारा नशा काफूर हो गया. थोड़ी देर तक वह मनोज की बात सुनता रहा, फिर पीना छोड़ कर उठ खड़ा हुआ और घर में किसी जरूरी काम का बहाना कर के वहां से चला गया.

बाहर आ कर वह कुछ दोस्तों से मिला और मनोज की बात उन्हें बताई. सब ने उसे यही सलाह दी कि इस बात की सूचना पुलिस को दे देनी चाहिए, क्योंकि बाद में वह भी पुलिसिया लफड़े में फंस सकता है. सोचविचार कर उस ने यह सूचना कंझावला थाने की पुलिस को दे दी.


पति द्वारा किसी औरत की हत्या की सूचना मिलते ही कंझावला थाने की पुलिस हरकत में आ गई. जेजे कालोनी सवदा पहुंच कर पुलिस ने मनोज गुजराती को हिरासत में ले लिया. थाने में जब मनोज से पूछताछ शुरू हुई, तब तक उस का नशा कम हो चुका था. पहले तो उस ने एसआई निखिल को बताया कि शराब के नशे में वह यह सब अपने दोस्त पर रौब जमाने के लिए  कह रहा था. लेकिन निखिल का एक करारा थप्पड़ उस के गले पर पड़ा तो उस के होश ठिकाने आ गए.

उस ने बताया कि वह अपनी पत्नी कोमल की हरकतों से बहुत परेशान था. इसलिए उस ने उसे बोंटा पार्क के जंगल में ले जा कर उस की हत्या कर दी है. बोंटा पार्क दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास है. कंझावला थाने से वह काफी दूर था. तब तक काफी रात हो चुकी थी, इसलिए अगली सुबह निखिल कांस्टेबल महेश और नरेश को साथ ले कर उत्तरी दिल्ली के मोरिसनगर थाने पहुंचे और वहां की थानाप्रभारी इंसपेक्टर आरती शर्मा को उन के इलाके के बोंटा पार्क में एक लड़की की हत्या किए जाने की सूचना दी.

17 जून, 2017 को कंझावला पुलिस द्वारा मिली इस सूचना को थाना मौरिसनगर के डीडी नंबर 14 ए में दर्ज करवा कर इंसपेक्टर आरती शर्मा ने अतिरिक्त थानाप्रभारी इंसपेक्टर  वीरेंद्र सिंह को इंसपेक्टर राकेश कुमार, एएसआई बिजेंद्र, हैडकांस्टेबल राजकुमार, सुखवीर, कांस्टेबल श्याम सैनी तथा महिला कांस्टेबल मधु को आरोपी मनोज और कंझावला पुलिस के साथ बोंटा पार्क भेजा.

पुलिस टीम पार्क के गेट नंबर 6 से अंदर दाखिल हुई. अंदर जा कर पुलिस कोमल की लाश की तलाश में जुट गई. मनोज ठीक से उस जगह के बारे में नहीं बता पा रहा था, जहां उस ने अपनी पत्नी कोमल की हत्या कर के उस की लाश छिपाई थी. पुलिस की तलाशी 12 घंटे तक जारी रही, लेकिन कोमल की लाश नहीं मिली. रात घिर आई थी, फिर भी तलाशी चलती रही.

रात के करीब 12 बजे मनोज पुलिस टीम को एक छोटी चट्टान के पास ले कर गया, जहां 22-23 साल की एक लड़की की लाश पड़ी थी. वह गुलाबी रंग का टौप और नीले रंग की जींस पहने थी. लाश की छानबीन करते समय इंसपेक्टर वीरेंद्र सिंह ने देखा कि उस के दाहिने हाथ पर कोमल गुदा हुआ था.


आरोपी मनोज ने लाश की ओर इशारा कर के बताया कि यह उस की पत्नी कोमल की लाश है, जिसे उस ने कल शाम को धोखे से यहां ला कर उस की हत्या कर दी थी. लाश की फोटोग्राफी कराने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए सब्जीमंडी मोर्चरी भेज दिया गया, साथ ही कोमल के घर वालों को फोन कर के उस की लाश की शिनाख्त के लिए सब्जी मंडी मोर्चरी बुला लिया गया.

17 जून को कोमल की बड़ी बहन गौरी सब्जी मंडी पहुंची,जहां लाश देखने के बाद उस ने उस की पहचान अपनी छोटी बहन और मनोज गुजराती की पत्नी कोमल के रूप में कर दी. कोमल की लाश की शिनाख्त होने के बाद गौरी की तहरीर पर उसी दिन कोमल की हत्या का मामला उस के पति मनोज गुजराती के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत दर्ज कर लिया गया. इस मामले की विवेचना इंसपेक्टर वीरेंद्र सिंह को सौंपी गई. गौरी के बयान तथा मनोज गुजराती के बयानों के बाद 2 साल की लव मैरिज का जो दर्दनाक वाकया सामने आया, वह इस प्रकार था—

कोमल के पिता चमनलाल का परिवार नांगलोई के चंचल पार्क में रहता था. उन के परिवार में पत्नी कमलेश के अलावा 4 बेटियां तथा 2 बेटे थे. इन में कोमल पांचवे नंबर की थी. घर के लोग उसे प्यार से कमली कह कर पुकारते थे. कोमल के बड़े भाई गंगाराम की शादी 8 साल पहले दिव्या से हुई थी. मनोज गुजराती दिव्या का चचेरा भाई था.

मनोज का परिवार कंझावला इलाके के सावदा गांव में रहता था. उस के परिवार में उस के अलावा इस के पिता राजू गुजराती, मां कमलेश तथा एक बहन परवीन थी. घर के बाहरी कमरे में मनोज की परचून की दुकान थी. दुकान अच्छीखासी चलती थी, जिस की वजह से मनोज की जेब हमेशा भरी होती थी. वह शौकीनमिजाज युवक था और हमेशा बनठन कर रहता था. चूंकि दोनों के परिवार आपस में रिश्तेदार थे, इसलिए समय समय पर उन का एकदूसरे के यहां आनाजाना लगा रहता था.


2 साल पहले एक दिन मनोज अपने दोस्तों के साथ मस्ती करने गुरुग्राम के सहारा मौल पहुंचा. वहां उस की नजर एक लड़की पर पड़ी, जो शक्लसूरत से जानीपहचानी लग रही थी. वह कोमल थी. मौडर्न कपड़ों, गहरे मेकअप और फ्लड लाइट की रंगबिरंगी रोशनी में कोमल बहुत ही सुंदर लग रही थी. दरअसल, कोमल वहां एक पब में नौकरी करती थी.

मनोज ने किसी बहाने से कोमल को अपने पास बुलाया तो दोनों ने एकदूसरे को पहचान लिया. बातोंबातों में मनोज ने उस का मोबाइल नंबर ले लिया और जल्द ही उस के घर चंचल पार्क आने का वादा किया. कोमल ने मनोज की खूब आवभगत की और उसे अपने साथ काम करने वाली कुछ सहेलियों से भी मिलवाया.

कोमल के लटकेझटके देख कर मनोज पहली ही नजर में उसे दिल दे बैठा. इधर कोमल भी मनोज के प्रति आकर्षित हो गई. उस दिन मनोज घर लौटा तो उस के दिलोदिमाग में कोमल की मनमोहिनी सूरत बसी हुई थी. वह जल्दी से जल्दी उसे अपनी बना लेना चाहता था.

उस दिन के बाद दोनों एकदूसरे को फोन कर के अपने दिल की बातें शेयर करने लगे. कोमल मनोज को हमेशा मौल में आने वाले हाईफाई लोगों के बारे में तरहतरह के किस्से सुनाती, जो मनोज को बहुत अच्छे लगते. वह कोमल को प्रभावित करने के लिए उसे महंगे तोहफे देने लगा. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा. दोनों के घर वाले इस सब से कब तक अनजान रह सकते थे. उन्हें भी उन के प्यार की जानकारी हो गई.

मनोज और कोमल के घर वाले यों तो रिश्तेदार थे, लेकिन पता नहीं क्यों उन्हें यह रिश्ता मंजूर नहीं था. कोमल के पिता चमनलाल को लगता था कि मनोज उन की बेटी को ज्यादा दिनों तक खुश नहीं रख पाएगा. मनोज सावदा गांव में रहता था, जहां के लोगों का रहनसहन पुराने जमाने जैसा था.

उधर मनोज के घर वालों की सोच भी कुछ ऐसी ही थी. जब मनोज और कोमल ने अपनेअपने घरों में अपनी पसंद जाहिर की तो उन्होंने इसे सिरे से नकार दिया. लेकिन प्यार इन बंदिशों को कहां मानता है. वैसे भी दोनों ही अपने पैरों पर खड़े थे. इसलिए 5 जून, 2015 को कोमल ने अपने मम्मीपापा की मर्जी के खिलाफ जा कर तीसहजारी कोर्ट में मनोज से शादी कर ली. शादी के बाद दोनों रघुबीर नगर में किराए का मकान ले कर रहने लगे.

8-10 महीने तो दोनों ने खूब मौजमस्ती की, लेकिन बाद में मनोज को कोमल का सहारा मौल में काम करना बुरा लगने लगा. उस ने कोमल से यह काम छोड़ देने के लिए कहा, पर वह इस के लिए तैयार नहीं थी. उसे मौल में जा कर परफौरमेंस देना और नएनए लोगों से मिल कर हंसनाबोलना अच्छा लगता था. बात आगे बढ़ी तो दोनों के बीच झगड़े शुरू हो गए. पड़ोसियों ने दोनों को समझाया तो कोमल मनोज के घर जेजे कालोनी, सावदा में रहने को तैयार हो गई.

इस के बाद कोमल अपने पति मनोज के साथ सावदा में जा कर रहने लगी. लेकिन घर छोटा होने के कारण उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. मनोज की एक बहन परवीन थी, जिस से उस की कतई नहीं बनती थी. यह देख कर मनोज ने दूसरी जगह किराए पर एक घर ले लिया और दोनों उसी में रहने लगे. कुछ दिनों तक दोनों सुखचैन से रहे. मनोज की जिंदगी में अचानक भूचाल तब आया, जब एक दिन वह कोमल के सूटकेस में रखी उसकी एलबम देख रहा था. एक फोटो में वह एक लड़के के साथ बहुत खुश दिख रही थी.

मनोज ने कोमल को वह फोटो दिखा कर उस लड़के के बारे में पूछा तो कोमल ने बताया कि यह अमित है और उस के साथ सहारा मौल में नौकरी करता था. अमित महज उस का दोस्त है. लेकिन मनोज को कोमल की बातों पर विश्वास नहीं हुआ. उस ने कोमल के जानकारों से अमित के बारे में पूछा तो पता चला कि शादी से पहले अमित कोमल का बौयफ्रैंड था. मनोज को यह जानकारी मिली तो वह परेशान हो गया. कोमल के बारे में यह जानकारी मिलने के बाद मनोज उस से उखड़ाउखड़ा रहने लगा.

कुछ ही दिनों बाद उन के बीच फिर से झगड़े शुरू हो गए. कोमल ने अपने घर में फोन कर के बताया कि मनोज उस से दहेज लाने के लिए दबाव डालता है और मना करने पर उस के साथ मारपिटाई करता है.

एक महीने बाद कोमल मनोज की मारपिटाई से दुखी हो कर अपनी बड़ी बहन किरण के पास रहने के लिए रघुवीरनगर चली गई. मनोज सावदा स्थित अपने घर में अकेला रह गया. एक दिन उसे पता चला कि कोमल फिर से अपने पुराने बौयफ्रैंड अमित से मिलने लगी है. यह जान कर मनोज को चिंता हुई कि कोमल कहीं उस से किनारा न कर ले. यही सोच कर उस ने कोमल के मोबाइल पर बात करने की कोशिश की. कुछ दिन तो कोमल मनोज के फोन को नजरअंदाज करती रही, लेकिन धीरेधीरे दोनों में बातचीत शुरू हो गई.crime story


एक महीना पहले कोमल ने मनोज को बताया कि वह बहन पर बोझ नहीं बनना चाहती, इसलिए उस ने रघुवीरनगर के ही डी ब्लौक में अपने लिए अलग कमरा ले लिया है, जहां रह कर अब वह फिर से जौब पर जाएगी. घर में बैठेबैठे उस का मन नहीं लगता. दूसरे बिना पैसों के जिंदगी भी नहीं चलती. मनोज को उस की यह बात अच्छी नहीं लगी तो उस ने उस के नौकरी करने का विरोध करते हुए वापस घर लौट आने के लिए कहा. इस पर कोमल ने ऐतराज करते हुए मनोज से कहा कि वह उस के साथ गांव में नहीं रहेगी, क्योंकि वह उस के  साथ गालीगलौच करने के साथ मारपीट करता है. ऐसा जीवन वह नहीं जी सकती.

15 जून, 2017 को मनोज अपनी दुकान छोड़ कर कोमल से मिलने उस के घर पहुंचा. मनोज को आया देख कर उस ने उसे और उस के परिवार वालों को बहुत बुराभला कहा. कोमल की बातों से मनोज को लगा कि वह उस के साथ नहीं रहना चाहती. उसे बहुत गुस्सा आया. घर पहुंच कर वह सोचने लगा कि उस ने कोमल से कोर्टमैरिज की है और वह उस की पत्नी है. अगर वह उस के साथ नहीं रहेगी तो वह भी उसे उस की मनमर्जी से नहीं जीने देगा.

अगले दिन सुबह उस ने एक मोबाइल शौप पर जा कर नया सिम खरीदा और एक मैकेनिक के यहां से क्लच वायर ले आया. उसी सिम से उस ने कोमल से बड़े प्यार से बात की. बातोंबातों में उस ने कोमल को घूमने जाने के लिए राजी कर लिया. उस दिन काफी बारिश हुई थी, जिस से मौसम सुहाना हो गया था.

16 जून को मनोज ने कोमल को फिर फोन कर के मिलने के लिए सीमेंट गोदाम के पास बुलाया. कोमल ने कहा कि वह उस के पास पहुंच जाएगी. 2 बजे मनोज अपनी मोटरसाइकिल से सीमेंट गोदाम के पास पहुंचा तो थोड़ी देर बाद कोमल आ गई. उस ने कोमल को मोटरसाइकिल की पिछली सीट पर बिठाया और रिंगरोड होते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी के बोंटा पार्क जा पहुंचा.

पार्क के गेट पर मोटरसाइकिल खड़ी कर के वह कोमल के साथ अंदर चला गया. कोमल को विश्वास में लेने के लिए वह उस से रोमांटिक बातें कर रहा था. वहां झाडि़यों के पास कई युवा जोड़े प्रेमालाप में मग्न थे. यह देख कर कोमल भी रोमांटिक हो गई. कोमल से प्यारीप्यारी बातें करते हुए मनोज उसे एकांत में ले गया, जहां दोनों एक साफसुथरी चट्टान पर बैठ गए. मनोज ने उसे बांहों में ले कर अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी और फिर से ऐसा न करने की कसम खाई तो कोमल खुश हो गई.

जब मनोज को लगा कि मौका एकदम सही है तो उस ने कोमल से कहा, ‘‘तुम अपना मुंह पीछे की तरफ कर लो, मैं तुम्हारे लिए एक सरप्राइज गिफ्ट लाया हूं.’’

कोमल ने खुश हो कर मुंह पीछे की ओर कर लिया. उचित मौका देख कर मनोज ने जेब में रखा क्लच वायर निकाला और कोमल की गर्दन पर लपेट कर कस दिया. कोमल ने मनोज को वायर ढीला करने के लिए कहा, साथ ही बचने के लिए बहुत हाथपैर मारे, जिस की वजह से मनोज के हाथों में खरोंचे भी आ गईं. लेकिन उस ने वायर को ढीला नहीं किया.

कुछ ही पलों में कोमल ने आखिरी हिचकी ली और उस की गर्दन एक ओर लुढ़क गई. कोमल की लाश को परे धकेल कर वह पार्क से बाहर आ गया और अपनी मोटरसाइकिल पर सवार हो कर घर लौट आया. इस के बाद उस ने अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए अपने दोस्त अनुज के साथ शराब की पार्टी की, जहां कोमल की हत्या का राज उस पर जाहिर कर दिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने 17 जून, 2017 को मनोज को तीसहजारी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

ବିଲୁଆଖାଇର ଭୟ- ଛବିରାଣୀ ମର୍ଡର ମିଷ୍ଟ୍ରିକୁ ନେଇ ସ୍ବତନ୍ତ୍ର ଉପସ୍ଥାପନା।

୧୯୮୦   ମସିହା ଅକ୍ଟୋବର ୨ ୩ ତାରିଖ ରାତି ପ୍ରାୟ ୯ଟା। ସବୁଠି ଅନ୍ଧାର ତା ' ର ସମ୍ରାଜ୍ୟ ବିସ୍ତାର କରିସାରିଥିବା ବେଳେ ହାଲୁକା ଶୀତୁଆ ପବନରେ ଦେହ ଶୀଦେଇ ଯାଉଥାଏ...